नमस्ते दोस्तों! अगर आप बिहार से हैं, तो आपने कभी न कभी अपने परिवार में जमीन को लेकर होने वाली माथापच्ची जरूर देखी होगी। “अरे, रसीद कटी क्या?”, “कर्मचारी जी मिल ही नहीं रहे हैं,” या “दाखिल-खारिज के लिए CO साहब के ऑफिस के कितने चक्कर और लगाने पड़ेंगे?” – ये डायलॉग हमारे घरों में बहुत आम हैं।
पहले जमीन का एक छोटा सा काम करवाने का मतलब था: तपती धूप में ब्लॉक (अंचल) जाना, बाबू लोगों की चिरौरी करना, और कभी-कभी तो दलालों के चक्कर में पड़ जाना। लेकिन क्या आपको पता है कि अब यह सब बदल चुका है? जी हाँ, अब आपकी जमीन का पूरा ब्यौरा आपके स्मार्टफोन या लैपटॉप की स्क्रीन पर मौजूद है। और यह सब मुमकिन हुआ है ‘बिहार भूमि’ (Bihar Bhumi) पोर्टल की वजह से।
आज हम बिल्कुल आसान भाषा में बात करेंगे कि यह Bihar Bhumi Portal क्या है, और यह हमारी जिंदगी को कैसे आसान बना रहा है।
आखिर ये ‘बिहार भूमि’ है क्या?
सीधे शब्दों में कहूं तो, Bihar Bhumi (biharbhumi.bihar.gov.in) बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की एक जादुई वेबसाइट है। यह एक ऐसा डिजिटल लॉकर है जहां बिहार की लगभग हर इंच जमीन का हिसाब-किताब रखा हुआ है।
अब आपको अपनी जमीन की रसीद कटवाने या खतियान देखने के लिए किसी फाइल या रजिस्टर के पन्ने पलटने की जरूरत नहीं है। सब कुछ ऑनलाइन हो गया है, बिल्कुल पारदर्शी और सुरक्षित।
चलिए इसे एक उदाहरण से समझते हैं
मान लीजिए कि आपकी कोई पुश्तैनी जमीन मधुबनी जिले के लौकही अंचल में है। पहले आपको उस जमीन की स्थिति या रसीद देखने के लिए लौकही ब्लॉक ऑफिस जाना पड़ता। लेकिन आज, आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठे हों, बस वेबसाइट खोलिए:
- अपना जिला (मधुबनी) चुनिए।
- अपना अंचल (लौकही) सेलेक्ट कीजिए।
- अपने गांव (मौजा) का नाम डालिए।
और बस! एक क्लिक में आपकी स्क्रीन पर आपकी जमीन का खाता, खेसरा, और जमाबंदी का पूरा डिटेल आ जाएगा। है ना कमाल की बात?

Bihar Bhumi Portal पर आप घर बैठे क्या-क्या कर सकते हैं?
अगर आप इस वेबसाइट को खोलेंगे, तो आपको बहुत सारे विकल्प दिखेंगे। चलिए, काम की चीजों को डिकोड करते हैं:
- ऑनलाइन लगान (जमीन की रसीद काटना): अब जमीन का टैक्स भरने के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। आप Google Pay, PhonePe, या नेट बैंकिंग से ऑनलाइन पेमेंट करके पीडीएफ (PDF) में रसीद डाउनलोड कर सकते हैं।
- अपना खाता और जमाबंदी देखना: आपकी जमीन का असली मालिक कौन है, खाता नंबर क्या है, और रकबा कितना है, ये सब आप बिना किसी से पूछे खुद चेक कर सकते हैं।
- दाखिल-खारिज (Mutation) के लिए अप्लाई करना: अगर आपने हाल ही में कोई नई जमीन खरीदी है, तो उसे अपने नाम पर करवाने (दाखिल-खारिज) के लिए आप केवाला (Sale Deed) अपलोड करके ऑनलाइन ही आवेदन कर सकते हैं। और सबसे अच्छी बात? आप घर बैठे उसका स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं।
- परिमार्जन (Parimarjan): यह मेरा पसंदीदा फीचर है! अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड में आपके नाम की स्पेलिंग गलत हो गई है, या रकबा कम-ज्यादा दिख रहा है, तो आप ‘परिमार्जन’ के जरिए उसे ऑनलाइन ही सुधारने की रिक्वेस्ट डाल सकते हैं।
- LPC (Land Possession Certificate): अगर आपको बैंक से केसीसी (KCC) लोन लेना है, तो LPC बहुत जरूरी होता है। इसके लिए भी आवेदन इसी पोर्टल से होता है।
एक जरूरी बात (सावधानी भी जरूरी है)
हालांकि सरकार ने सब कुछ ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन फिर भी हमें थोड़ा जागरूक रहने की जरूरत है। अपना पुराना खतियान और पुरानी ऑफलाइन रसीदें हमेशा सुरक्षित रखें। ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक करते समय अगर कोई गलती दिखे, तो उसे इग्नोर न करें, तुरंत परिमार्जन के लिए अप्लाई करें।
डिजिटल दुनिया में आपकी जानकारी ही आपकी ताकत है। अपने गांव और परिवार के बड़े-बुजुर्गों को भी इस पोर्टल के बारे में बताएं, ताकि उन्हें भी अंचल ऑफिस के धक्के न खाने पड़ें।
क्या आपने कभी Bihar Bhumi Portal का इस्तेमाल किया है? या आपका दाखिल-खारिज अभी भी पेंडिंग है? अगर आपके मन में जमीन से जुड़ा कोई भी सवाल है, तो बेझिझक कमेंट्स में पूछें। हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे!
| बिहार सरकार की अधिकारिक वेबसाइट | यहाँ पर क्लिक करें |
| ऑफिसियल पता | https://biharbhumi.bihar.gov.in/ |
FAQ– Bihar Bhumi Portal
टेंशन मत लीजिए, यह बहुत आम बात है। सबसे पहले पोर्टल पर अपना स्टेटस चेक करें और ‘रिजेक्शन का कारण’ (Reason for Rejection) ध्यान से पढ़ें। कई बार कोई छोटा सा डॉक्यूमेंट (जैसे वंशावली या पुराना केवाला) छूट जाने पर एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती है। कारण जानकर सही कागजात के साथ दोबारा ऑनलाइन अप्लाई करें। अगर फिर भी बात न बने, तो सारे कागजात लेकर एक बार अंचल कार्यालय (ब्लॉक) में कर्मचारी जी से मिल लें।
घबराइए मत! आपकी जमीन बिल्कुल सुरक्षित है। बिहार में जब पुराने रजिस्टरों को ऑनलाइन (डिजिटाइज) किया जा रहा था, तब डेटा एंट्री में कई नाम छूट गए थे। इसके लिए आपको Bihar Bhumi Portal पर मौजूद ‘परिमार्जन‘ (Parimarjan) वाले ऑप्शन पर जाना होगा। वहां “छूटे हुए जमाबंदी का डिजिटाइजेशन” के लिए अपनी पुरानी रसीद और खतियान की फोटोकॉपी अपलोड करके ऑनलाइन रिक्वेस्ट डाल दें।
बिल्कुल नहीं! अगर पैसा कट गया है और रसीद स्क्रीन पर नहीं आई है, तो तुरंत दोबारा पेमेंट भूलकर भी न करें। सिस्टम को अपडेट होने में कभी-कभी 24 से 48 घंटे लग जाते हैं। वेबसाइट पर जाकर “Pending Payment Status” वाले विकल्प पर अपना ट्रांजेक्शन नंबर डालकर चेक करें। ज्यादातर मामलों में पेमेंट अपडेट हो जाता है और आपकी रसीद पीडीएफ में आ जाती है।
जी हाँ, बिल्कुल! मान लीजिए आप मधुबनी जिले के लौकही अंचल के किसी मौजे (गाँव) का नक्शा देखना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको ‘बिहार भू-नक्शा‘ (Bhu-Naksha Bihar) वेबसाइट पर जाना होगा। आप वहां अपनी जमीन का डिजिटल नक्शा फ्री में देख सकते हैं। अगर आपको असली बड़ा वाला नक्शा चाहिए, तो आप थोड़ी सी ऑनलाइन फीस देकर स्पीड पोस्ट के जरिए उसे सीधे अपने घर पर भी मंगवा सकते हैं।
अगर खतियान आपके दादा या परदादा के नाम पर है, तो सरकार को कैसे पता चलेगा कि आप ही उनके असली वारिस हैं? इसके लिए वंशावली चाहिए होती है। यह एक चार्ट होता है जिसमें आपके खानदान का पूरा पेड़ बना होता है। इसे बनवाने के लिए आपको अपने ग्राम पंचायत के सरपंच से साइन करवाना होता है, और कई मामलों में कोर्ट से फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट का एफिडेविट (शपथ पत्र) भी देना पड़ता है।
सीधे शब्दों में कहें तो- नहीं। बैंक को यह लिखित गारंटी चाहिए होती है कि जिस जमीन पर आप लोन ले रहे हैं, उस पर अभी कब्ज़ा आप ही का है। और यह गारंटी LPC से ही मिलती है। अच्छी बात यह है कि अगर आपकी जमाबंदी ऑनलाइन दिख रही है और आपने हाल ही की रसीद कटवा रखी है, तो आप LPC के लिए भी Bihar Bhumi पोर्टल से घर बैठे अप्लाई कर सकते हैं।